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*बारिश में बदहाल हुई ग्राम पंचायत कोटा की तस्वीर: बस स्टैंड से स्वास्थ : *बारिश में बदहाल हुई ग्राम पंचायत कोटा की तस्वीर: बस स्टैंड से स्वास्थ्य केंद्र तक कीचड़ का साम्राज्य, ग्रामीणों का आरोप

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Tue, Jun 30, 2026

बारिश में बदहाल हुई ग्राम पंचायत कोटा की तस्वीर: बस स्टैंड से स्वास्थ्य केंद्र तक कीचड़ का साम्राज्य, ग्रामीणों का आरोप— कई बार गुहार लगाने के बाद भी नहीं हुई सुनवाई, अब कलेक्टर से न्याय की उम्मीद

पटेरा (दमोह)। मानसून की पहली तेज बारिश ने जनपद पंचायत पटेरा की ग्राम पंचायत कोटा में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। गांव के मुख्य मार्गों पर फैले कीचड़ और जलभराव ने ग्रामीणों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बस स्टैंड से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक जाने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों दलदल में तब्दील हो चुका है। सड़क पर जगह-जगह पानी भरा हुआ है और कीचड़ इतना अधिक है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत के सरपंच से शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि तीन से चार बार व्यक्तिगत रूप से समस्या से अवगत कराने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला, जबकि हालात लगातार बिगड़ते चले गए। बारिश बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो गई है तथा अब लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, बस स्टैंड से स्वास्थ्य केंद्र तक का मार्ग गांव की सबसे महत्वपूर्ण सड़क है। इसी रास्ते से मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं और ग्रामीण अपने दैनिक कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति में सड़क कीचड़ से पूरी तरह ढक चुकी है। कई स्थानों पर पानी भर जाने से गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग फिसलकर गिर चुके हैं और यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने सरपंच से दोबारा समस्या के समाधान की मांग की तो उन्हें बताया गया कि संबंधित सड़क लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आती है, इसलिए पंचायत इस पर कोई कार्य नहीं करा सकती। हालांकि ग्रामीण इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित इस मार्ग की जिम्मेदारी तय होना चाहिए और यदि वास्तव में सड़क किसी अन्य विभाग के अधीन है तो पंचायत को संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर समस्या का समाधान कराने की पहल करनी चाहिए। केवल जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डाल देने से ग्रामीणों की परेशानी कम नहीं होगी।

बारिश के कारण सड़क पर जमा पानी और कीचड़ ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है और संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। वहीं स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में होने वाली कठिनाई के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। यदि किसी गंभीर मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े तो यह मार्ग बड़ी बाधा बन सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विकास कार्यों के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है। गांव का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ही यदि बारिश में चलने लायक नहीं बचा है तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत, जल निकासी और नियमित रखरखाव पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष बारिश के मौसम में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। अस्थायी रूप से मिट्टी या मुरम डालकर काम चलाया जाता है, जो पहली ही बारिश में बह जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि स्थायी निर्माण कार्य की आवश्यकता है ताकि आने वाले वर्षों में लोगों को इसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति अभी भी उम्मीद बनी हुई है। उनका कहना है कि अब उन्हें जिला कलेक्टर से ही न्याय की आशा है। उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर भेजे, वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए और सड़क की तत्काल मरम्मत, जल निकासी की व्यवस्था तथा स्थायी समाधान के लिए आवश्यक स्वीकृति प्रदान की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बारिश बढ़ने के साथ हालात और अधिक गंभीर हो जाएंगे।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि सड़क वास्तव में पीडब्ल्यूडी के अधीन है तो संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश जारी किए जाएं और यदि पंचायत की जिम्मेदारी बनती है तो ग्राम पंचायत को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर शीघ्र कार्य शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय करने में समय बर्बाद करने के बजाय लोगों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

फिलहाल ग्राम पंचायत कोटा में सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों की परेशानी का कारण बनी हुई है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की ओर हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही उन्हें कीचड़ और जलभराव से राहत मिलेगी, ताकि गांव का मुख्य मार्ग फिर से सुरक्षित और सुगम बन सके।

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