शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विव : राजेंद्रग्राम कोर्ट ने आपसी सहमति से दी डिक्री
Jankranti Express
Tue, Sep 15, 2026
शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह विच्छेद, राजेंद्रग्राम कोर्ट ने आपसी सहमति से दी डिक्री

करीब 9 साल के वैवाहिक जीवन के बाद दोनों हुए अलग, 2021 से रह रहे थे अलग-अलग; बेटी हिमाद्री सिंह के साथ रहेगी
अनूपपुर/शहडोल। शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक संबंध अब कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति के आधार पर 3 सितंबर 2026 को विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की। दोनों का विवाह 23 नवंबर 2017 को हिंदू रीति-रिवाज से राजेंद्रग्राम में हुआ था।

न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार विवाह के बाद दोनों साथ रहे और 20 जून 2019 को बेटी गिरिशा सिंह का जन्म हुआ। इसके बाद दंपती के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगे। विवाद बढ़ने के बाद दोनों के बीच मिलना-जुलना बंद हो गया और 5 मई 2021 से दोनों अलग-अलग रहने लगे।
साथ रहने की संभावना नहीं होने की बात कही
न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में दोनों पक्षों ने विवाह विच्छेद के लिए आपसी सहमति जताई। हिमाद्री सिंह की ओर से कहा गया कि अब दोनों के साथ रहने की कोई संभावना नहीं है और उनका वैवाहिक दाम्पत्य जीवन समाप्त हो चुका है। दस्तावेजों में एक-दूसरे पर किसी विशेष आरोप के बजाय यह कहा गया कि उनके बीच वैवाहिक संबंध सामान्य रूप से आगे चलाना संभव नहीं है।
बेटी हिमाद्री के साथ रहेगी
न्यायालय के समक्ष रखे गए तथ्यों के मुताबिक बेटी गिरिशा सिंह हिमाद्री सिंह के साथ रह रही है। उसके पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य में विवाह संबंधी खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह द्वारा उठाए जाने की बात कही गई है। हिमाद्री सिंह ने अपने और बेटी के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से भरण-पोषण अथवा गुजारा भत्ता नहीं मांगने की बात भी कही।
वहीं, विवाह के दौरान दिए गए गिफ्ट और जेवरात को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच किसी विवाद की बात सामने नहीं आई।
छह महीने तक सुलह का दिया गया मौका
न्यायालय ने दोनों पक्षों को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने और पुनर्मिलन का अवसर देने के लिए छह महीने का समय दिया। इस दौरान सुलह के प्रयास भी किए गए, लेकिन दोनों के बीच पुनर्मिलन नहीं हो सका। अवधि पूरी होने के बाद दोनों ने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया कि वे पति-पत्नी के रूप में साथ नहीं रहना चाहते और आपसी सहमति से विवाह विच्छेद चाहते हैं।
इसके बाद न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए माना कि दोनों का पति-पत्नी के रूप में साथ रहकर दाम्पत्य जीवन निभाना संभव नहीं है। इसी आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत 3 सितंबर 2026 को विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी गई।
नरेंद्र सिंह मरावी बोले- आपसी सहमति से हुआ फैसला
तलाक के संबंध में नरेंद्र सिंह मरावी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि तलाक के लिए दोनों की आपसी सहमति थी और कोर्ट ने इस पर निर्णय कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अभी न्यायालय का आदेश नहीं देखा है।
वहीं, हिमाद्री सिंह का पक्ष जानने के लिए फोन किए जाने की बात भी सामने आई, लेकिन उनका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।
राजनीतिक रूप से भी चर्चित रहा दोनों का रिश्ता
हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का रिश्ता राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में रहा है। दोनों परिवारों के बीच पहले भी चुनावी मुकाबला हो चुका है। नरेंद्र सिंह मरावी वर्ष 2009 में शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी थे, जहां उनका मुकाबला हिमाद्री सिंह की मां राजेश नंदिनी सिंह से हुआ था। राजेश नंदिनी सिंह ने उन्हें 13,415 मतों से पराजित किया था। इसके बाद 23 नवंबर 2017 को हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह हुआ।
हिमाद्री सिंह ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर शहडोल लोकसभा उपचुनाव लड़ा था। इसके बाद वर्ष 2019 में भाजपा में शामिल होकर शहडोल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वर्ष 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर शहडोल का प्रतिनिधित्व किया।
नरेंद्र सिंह मरावी भी भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वे जिला पंचायत अनूपपुर के सदस्य रहने के साथ भाजपा युवा मोर्चा और अनुसूचित जनजाति मोर्चा में विभिन्न पदों पर रहे तथा मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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