शहर में ओवरलोड डंपर भर रहे फर्राटे, आखिर खनिज विभाग की नजर क्यों नहीं : शहर में ओवरलोड डंपर भर रहे फर्राटे, आखिर खनिज विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही?कब तक अवैध परिवहन होगा नजरअंदाज?
Jankranti Express
Sun, Jul 19, 2026
.शहर में ओवरलोड डंपर भर रहे फर्राटे, आखिर खनिज विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही?कब तक अवैध परिवहन होगा नजरअंदाज?

पथरिया। नगर से लेकर ग्रामीण मार्गों तक रेत और गिट्टी से भरे ओवरलोड डंपर तथा बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेखौफ दौड़ रही हैं। कई वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लदा दिखाई देता है, जबकि कुछ वाहन बिना स्पष्ट नंबर प्लेट के परिवहन करते नजर आते हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा, सरकारी राजस्व और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-रात हो रहे इस परिवहन को नजरअंदाज करना आसान नहीं है, फिर भी खनिज विभाग की ओर से प्रभावी जांच और कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है और राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। यदि समय रहते वाहनों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और नियमों के तहत सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो अवैध खनिज परिवहन पर रोक लगाना और मुश्किल हो जाएगा।
कार्रवाई नहीं, सिर्फ दावों का आरोप

स्थानीय नागरिक अमर साहू, रमेश पटेल, आनंद लोधी और राहुल सहित अन्य लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जांच नहीं होती। उनका कहना है कि जब अवैध परिवहन खुलेआम दिखाई दे रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
रहवासियों की मांग
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—ओवरलोड वाहनों का वजन तत्काल जांचा जाए।बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की विशेष जांच की जाए।
वैध दस्तावेज एवं रॉयल्टी की जांच कराई जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।जवाब मांगते सवाल
ओवरलोड वाहन आखिर किसकी निगरानी में सड़कों पर दौड़ रहे हैं?बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
खनिज विभाग की जांच जमीनी स्तर पर दिखाई क्यों नहीं देती?
अवैध खनिज परिवहन पर सख्त कार्रवाई आखिर कब शुरू होगी?
> (नोट: यह समाचार स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों और मौके पर दिखाई देने वाली स्थिति पर आधारित है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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