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गायत्री कल्पवृक्ष से मिला आदर्श जीवन का संदेश, गायत्री महामंत्र के नौ गुणों का किया गया प्रेरक वर्णन

हटा: गायत्री प्रज्ञापीठ तेवरईया में श्रद्धा और साधना के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव हटा। समीपस्थ ग्र

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हटा कॉलेज में गुरु पूर्णिमा का भव्य आयोजन: 'समाज, देशहित और परोपकार ही सच्ची गुरु दक्षिणा' का दिया संदेश

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Fri, Jul 31, 2026

.हटा: गायत्री प्रज्ञापीठ तेवरईया में श्रद्धा और साधना के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव

हटा: गायत्री प्रज्ञापीठ तेवरईया में श्रद्धा और साधना के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव  हटा। समीपस्थ ग्राम तेवरईया स्थित गायत्री प्रज्ञापीठ में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, साधना और यज्ञीय वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। महोत्सव में मुहरई, हिनौता, रमतलैया, देवरा जामशा, खमरगौर और कचनारी सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।  महोत्सव के पहले दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक 45 हजार गायत्री मंत्रों का सामूहिक अखंड जाप किया गया। पूरे दिन चले मंत्रोच्चार से प्रज्ञापीठ परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। साधकों ने विश्व शांति, सद्बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ साधना में सहभागिता निभाई।  दूसरे दिन प्रातःकाल गुरुपूजन, देवपूजन एवं पंचकुंडीय महायज्ञ का आयोजन हुआ। वैदिक कर्मकांड का संचालन मुहरई से आए हरिगोविंद पटेल एवं पंडित गिरधर पटेरिया ने विधि-विधान से कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गुरु जीवन को अज्ञान से ज्ञान, दुर्बलता से सामर्थ्य और स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु के आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनकी सच्ची पूजा है।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिनेश दुबे ने कहा कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो श्रद्धा, समर्पण, आत्मचिंतन और आत्मपरिष्कार का संदेश देती है। उन्होंने बताया कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा स्थापित गायत्री परिवार व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का अभियान चला रहा है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता समय की आवश्यकता है।  इस अवसर पर समाजसेवी नर्मदा असाटी ने प्रज्ञापीठ को 3,000 मंत्र लेखन पुस्तिकाएं भेंट कीं। उनके इस प्रेरक योगदान का उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।  कार्यक्रम में प्रधान अध्यापक पं. अशोक दुबे, रामप्रसाद पटेल, डॉ. जानकी पटेल, माधव प्रसाद पटेल, डॉ. उत्तम सिंह राजपूत, बाबूलाल पटेल, गंगाराम नामदेव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समापन अवसर पर पं. रामस्वरूप दुबे एवं दुर्गा प्रसाद पटेल ने कार्यक्रम के सहयोगियों घनश्याम दाहिया, शिवम पटेल, लखन पटेल, अभिषेक दाहिया सहित सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। प्रसादी वितरण के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

हटा। समीपस्थ ग्राम तेवरईया स्थित गायत्री प्रज्ञापीठ में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, साधना और यज्ञीय वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। महोत्सव में मुहरई, हिनौता, रमतलैया, देवरा जामशा, खमरगौर और कचनारी सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

महोत्सव के पहले दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक 45 हजार गायत्री मंत्रों का सामूहिक अखंड जाप किया गया। पूरे दिन चले मंत्रोच्चार से प्रज्ञापीठ परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। साधकों ने विश्व शांति, सद्बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ साधना में सहभागिता निभाई।

दूसरे दिन प्रातःकाल गुरुपूजन, देवपूजन एवं पंचकुंडीय महायज्ञ का आयोजन हुआ। वैदिक कर्मकांड का संचालन मुहरई से आए हरिगोविंद पटेल एवं पंडित गिरधर पटेरिया ने विधि-विधान से कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गुरु जीवन को अज्ञान से ज्ञान, दुर्बलता से सामर्थ्य और स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु के आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनकी सच्ची पूजा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिनेश दुबे ने कहा कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो श्रद्धा, समर्पण, आत्मचिंतन और आत्मपरिष्कार का संदेश देती है। उन्होंने बताया कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा स्थापित गायत्री परिवार व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का अभियान चला रहा है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर समाजसेवी नर्मदा असाटी ने प्रज्ञापीठ को 3,000 मंत्र लेखन पुस्तिकाएं भेंट कीं। उनके इस प्रेरक योगदान का उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

कार्यक्रम में प्रधान अध्यापक पं. अशोक दुबे, रामप्रसाद पटेल, डॉ. जानकी पटेल, माधव प्रसाद पटेल, डॉ. उत्तम सिंह राजपूत, बाबूलाल पटेल, गंगाराम नामदेव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समापन अवसर पर पं. रामस्वरूप दुबे एवं दुर्गा प्रसाद पटेल ने कार्यक्रम के सहयोगियों घनश्याम दाहिया, शिवम पटेल, लखन पटेल, अभिषेक दाहिया सहित सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। प्रसादी वितरण के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

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