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दमोह बकायन में गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का आगाज़, राग मेघ और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां दमोह। मध्यप्रदे

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दमोह बकायन में गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का आगाज़, राग मेघ और कथक की : दमोह बकायन में गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का आगाज़, राग मेघ और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां दमोह। मध्यप्रदे

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Wed, Jul 29, 2026

..दमोह बकायन में गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का आगाज़, राग मेघ और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

दमोह बकायन में गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का आगाज़, राग मेघ और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां  दमोह। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन दमोह एवं उत्थान साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, ग्राम बकायन के सहयोग से आयोजित 132वें मृदंगाचार्य पंडित नाना साहेब पानसे स्मृति गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का शुभारंभ बुधवार को ग्राम बकायन में हुआ। समारोह के शुभारंभ से पूर्व आयोजित प्रातःकालीन संगीत सभा में शास्त्रीय संगीत और कथक नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  कार्यक्रम की शुरुआत ग्वालियर की कथक नृत्यांगना सुश्री हृदयांशी केतकर की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने भगवान शिव की आराधना स्वरूप शिव रुद्राष्टकम पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद जयपुर घराने की पारंपरिक कथक शैली में तीन ताल पर आमद, उठान, तोड़े, परण, कवित्त और तिहाइयों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। अंतिम प्रस्तुति में ठुमरी "रोके डगरिया थाड़ो..." के माध्यम से कथक के भाव पक्ष को जीवंत किया।  इसके बाद भोपाल की शास्त्रीय गायिका सुश्री श्रद्धा जैन ने वर्षा ऋतु के अनुरूप राग मेघ में अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बड़ा खयाल "बदरवा बरसे बिजुरी चमके...", छोटा खयाल और तराना प्रस्तुत किया। अंत में प्रसिद्ध भजन "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो..." से अपनी प्रस्तुति का समापन किया। तबले पर श्री मनोज पाटीदार ने संगत की।  प्रातःकालीन सभा की अंतिम प्रस्तुति चक्रधर नृत्य केंद्र, भोपाल के कलाकारों ने गुरु सुश्री अल्पना वाजपेयी के निर्देशन में दी। कलाकारों ने कबीरदास रचित "गुरु चरण कमल बलिहारी..." पर गुरु वंदना से शुरुआत की। इसके बाद रायगढ़ घराने की झपताल आधारित शुद्ध कथक, ठुमरी "काहे करत मो से परजोरी...", तकनीकी नृत्य पक्ष तथा अंत में राग मेघ पर आधारित "मेघ श्याम घननम श्याम..." की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।  प्रस्तुति में सितार पर श्री अनिरुद्ध जोशी, तबले पर श्री अभिजीत गढ़ेकर, गायन में श्री मुनि मालवीय तथा पढ़ंत में गुरु सुश्री अल्पना वाजपेयी ने संगत कर कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाया।  गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस संगीत समारोह में शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य और गुरु परंपरा की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गरिमा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

दमोह। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन दमोह एवं उत्थान साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, ग्राम बकायन के सहयोग से आयोजित 132वें मृदंगाचार्य पंडित नाना साहेब पानसे स्मृति गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का शुभारंभ बुधवार को ग्राम बकायन में हुआ। समारोह के शुभारंभ से पूर्व आयोजित प्रातःकालीन संगीत सभा में शास्त्रीय संगीत और कथक नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दमोह बकायन में गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का आगाज़, राग मेघ और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां  दमोह। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन दमोह एवं उत्थान साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, ग्राम बकायन के सहयोग से आयोजित 132वें मृदंगाचार्य पंडित नाना साहेब पानसे स्मृति गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का शुभारंभ बुधवार को ग्राम बकायन में हुआ। समारोह के शुभारंभ से पूर्व आयोजित प्रातःकालीन संगीत सभा में शास्त्रीय संगीत और कथक नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  कार्यक्रम की शुरुआत ग्वालियर की कथक नृत्यांगना सुश्री हृदयांशी केतकर की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने भगवान शिव की आराधना स्वरूप शिव रुद्राष्टकम पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद जयपुर घराने की पारंपरिक कथक शैली में तीन ताल पर आमद, उठान, तोड़े, परण, कवित्त और तिहाइयों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। अंतिम प्रस्तुति में ठुमरी "रोके डगरिया थाड़ो..." के माध्यम से कथक के भाव पक्ष को जीवंत किया।  इसके बाद भोपाल की शास्त्रीय गायिका सुश्री श्रद्धा जैन ने वर्षा ऋतु के अनुरूप राग मेघ में अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बड़ा खयाल "बदरवा बरसे बिजुरी चमके...", छोटा खयाल और तराना प्रस्तुत किया। अंत में प्रसिद्ध भजन "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो..." से अपनी प्रस्तुति का समापन किया। तबले पर श्री मनोज पाटीदार ने संगत की।  प्रातःकालीन सभा की अंतिम प्रस्तुति चक्रधर नृत्य केंद्र, भोपाल के कलाकारों ने गुरु सुश्री अल्पना वाजपेयी के निर्देशन में दी। कलाकारों ने कबीरदास रचित "गुरु चरण कमल बलिहारी..." पर गुरु वंदना से शुरुआत की। इसके बाद रायगढ़ घराने की झपताल आधारित शुद्ध कथक, ठुमरी "काहे करत मो से परजोरी...", तकनीकी नृत्य पक्ष तथा अंत में राग मेघ पर आधारित "मेघ श्याम घननम श्याम..." की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।  प्रस्तुति में सितार पर श्री अनिरुद्ध जोशी, तबले पर श्री अभिजीत गढ़ेकर, गायन में श्री मुनि मालवीय तथा पढ़ंत में गुरु सुश्री अल्पना वाजपेयी ने संगत कर कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाया।  गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस संगीत समारोह में शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य और गुरु परंपरा की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गरिमा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत ग्वालियर की कथक नृत्यांगना सुश्री हृदयांशी केतकर की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने भगवान शिव की आराधना स्वरूप शिव रुद्राष्टकम पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद जयपुर घराने की पारंपरिक कथक शैली में तीन ताल पर आमद, उठान, तोड़े, परण, कवित्त और तिहाइयों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। अंतिम प्रस्तुति में ठुमरी "रोके डगरिया थाड़ो..." के माध्यम से कथक के भाव पक्ष को जीवंत किया।

इसके बाद भोपाल की शास्त्रीय गायिका सुश्री श्रद्धा जैन ने वर्षा ऋतु के अनुरूप राग मेघ में अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बड़ा खयाल "बदरवा बरसे बिजुरी चमके...", छोटा खयाल और तराना प्रस्तुत किया। अंत में प्रसिद्ध भजन "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो..." से अपनी प्रस्तुति का समापन किया। तबले पर श्री मनोज पाटीदार ने संगत की।

प्रातःकालीन सभा की अंतिम प्रस्तुति चक्रधर नृत्य केंद्र, भोपाल के कलाकारों ने गुरु सुश्री अल्पना वाजपेयी के निर्देशन में दी। कलाकारों ने कबीरदास रचित "गुरु चरण कमल बलिहारी..." पर गुरु वंदना से शुरुआत की। इसके बाद रायगढ़ घराने की झपताल आधारित शुद्ध कथक, ठुमरी "काहे करत मो से परजोरी...", तकनीकी नृत्य पक्ष तथा अंत में राग मेघ पर आधारित "मेघ श्याम घननम श्याम..." की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

प्रस्तुति में सितार पर श्री अनिरुद्ध जोशी, तबले पर श्री अभिजीत गढ़ेकर, गायन में श्री मुनि मालवीय तथा पढ़ंत में गुरु सुश्री अल्पना वाजपेयी ने संगत कर कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाया।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस संगीत समारोह में शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य और गुरु परंपरा की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गरिमा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

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