दमोह: "मैं कौन हूं?"— इसी प्रश्न का उत्तर समझाता है गुरु, गायत्री शक्त : दमोह: "मैं कौन हूं?"— इसी प्रश्न का उत्तर समझाता है गुरु, गायत्री शक्तिपीठ में गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा के साथ संपन्
Jankranti Express
Sat, Aug 1, 2026
दमोह: "मैं कौन हूं?"— इसी प्रश्न का उत्तर समझाता है गुरु, गायत्री शक्तिपीठ में गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा के साथ संपन्न

दमोह। गायत्री शक्तिपीठ, दमोह में आयोजित दो दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। महोत्सव के प्रथम दिवस 71 भाई-बहनों ने गायत्री महामंत्र के मौन सामूहिक जप में सहभागिता कर विश्व शांति एवं लोकमंगल के लिए अपनी साधना समर्पित की।

दूसरे दिन प्रातः 7 बजे व्यास पूजन, गुरु वंदना एवं गुरु तत्व पर विशेष प्रवचन का आयोजन किया गया। शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे टोली नायक योगिराज बल्की ने कहा कि "आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्थ गुरु का होना आवश्यक है। सच्चा गुरु अपने तप के अंश से शिष्य को भवसागर से पार लगाने का मार्ग प्रशस्त करता है।" उन्होंने कहा कि जीवन का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न "मैं कौन हूं?" है और इसी प्रश्न का उत्तर गुरु शिष्य को आत्मबोध के माध्यम से कराता है।
इसके बाद प्रातः 8 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक नौ कुंडीय यज्ञशाला में तीन पालियों में यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लोकमंगल एवं विश्व कल्याण की भावना से आहुतियां अर्पित कीं।
इस अवसर पर दमोह के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुभाष सिंह सोलंकी ने व्यास गद्दी का पूजन कर अपने संबोधन में कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से गायत्री परिवार के विचारों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनका विवाह गायत्री परिवार की वैदिक पद्धति से हुआ था तथा हाल ही में उनके पुत्र का विवाह भी इसी परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ। उन्होंने गुरुदेव से प्रार्थना की कि जीवन के अंतिम समय तक उनका परिवार गायत्री परिवार से जुड़ा रहे।
सायंकालीन प्रवचन में योगिराज बल्की ने ठाकुर रामकृष्ण परमहंस का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि मनुष्य जब अपने वास्तविक स्वरूप और अपने आध्यात्मिक धाम को पहचान लेता है, तब ईश्वर से उसका सीधा संबंध स्थापित हो जाता है। उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु वही है जो शिष्य को उसकी वास्तविक पहचान करा दे और आत्मोद्धार का मार्ग दिखाए। गुरुपूर्णिमा का वास्तविक संदेश भी यही है कि गुरु से जीवन का सत्य और मुक्ति का मार्ग समझा जाए।
संध्याकालीन प्रवचन में गायत्री परिवार के परिजनों के साथ शहर एवं बाहर से आए अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर गुरु भंडारे का आयोजन किया गया, जो देर रात तक श्रद्धालुओं के लिए चलता रहा।
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