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भीमकुंड विवाद में नया मोड़: ट्रस्ट का पलटवार, 60 नहीं 33 एकड़ भूमि होन : भीमकुंड विवाद में नया मोड़: ट्रस्ट का पलटवार, 60 नहीं 33 एकड़ भूमि होने का दावा

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Fri, Aug 7, 2026

भीमकुंड विवाद में नया मोड़: ट्रस्ट का पलटवार, 60 नहीं 33 एकड़ भूमि होने का दावा

भीमकुंड विवाद में नया मोड़: ट्रस्ट का पलटवार, 60 नहीं 33 एकड़ भूमि होने का दावा

बकस्वाहा से |रिपोर्टर विनोद कुमार जैन

भीमकुंड धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को भीमकुंड लोक न्याय ट्रस्ट ने प्रेसवार्ता कर अपने ऊपर लगे आरोपों का विस्तृत जवाब दिया। ट्रस्ट के सचिव वीरेन्द्र आसाटी ने अवैध वसूली, भ्रष्टाचार, भूमि घोटाले और निजी लाभ जैसे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया कि ट्रस्ट की सभी गतिविधियां नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संचालित हो रही हैं।

भीमकुंड विवाद में नया मोड़: ट्रस्ट का पलटवार, 60 नहीं 33 एकड़ भूमि होने का दावा

प्रेसवार्ता में ट्रस्ट ने सबसे बड़ा दावा करते हुए कहा कि ट्रस्ट के पास 60 एकड़ नहीं, बल्कि लगभग 33 एकड़ भूमि है, जिसका पूरा रिकॉर्ड राजस्व दस्तावेजों में दर्ज है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने ऑडिट रिपोर्ट, रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित प्रबंध समिति की सूची तथा एसडीएम से अनुमोदित ट्रस्ट सूची भी मीडिया के सामने प्रस्तुत की।

पार्किंग की राशि पर दी सफाई

ट्रस्ट ने पार्किंग शुल्क को लेकर उठे सवालों पर कहा कि यह राशि सहयोग राशि के रूप में ली जाती है और इसका उपयोग विद्यार्थियों की शिक्षा व अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर किया जाता है। ट्रस्ट का दावा है कि राशि का पूरा लेखा-जोखा रिकॉर्ड में दर्ज है और किसी भी व्यक्ति के निजी लाभ के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाता।

महंत और अध्यक्ष की नियुक्ति नियमों के तहत

महंत एवं अध्यक्ष की नियुक्ति पर उठे विवाद को लेकर ट्रस्ट ने कहा कि संस्था के बायलॉज के अनुसार ट्रस्ट को इन पदों पर नियुक्ति का अधिकार प्राप्त है। नियुक्ति की प्रक्रिया संस्था के सदस्यों द्वारा तय नियमों के अनुसार होती है और इसके लिए सार्वजनिक विज्ञापन की आवश्यकता नहीं होती।

भ्रष्टाचार के आरोपों को किया खारिज

ट्रस्ट ने कृषि भूमि के ठेके, मंदिर विकास, संस्कृत विद्यालय संचालन और कथित अवैध वसूली से जुड़े सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यदि किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। ट्रस्ट ने कहा कि सभी व्यवस्थाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध है और किसी भी जांच में प्रस्तुत किया जा सकता है।

दूसरे पक्ष ने की समिति भंग करने की मांग

ट्रस्ट की प्रेसवार्ता के तुरंत बाद दूसरे पक्ष ने भी मीडिया के सामने आकर वर्तमान समिति को भंग कर नई समिति गठित करने की मांग की। जनपद उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह बुंदेला और मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र शुक्ला सहित अन्य लोगों ने स्थानीय लोगों को नई समिति में प्राथमिकता देने तथा पार्किंग शुल्क और महंत की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

ट्रस्ट ने अंत में कहा कि भीमकुंड धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है और विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, बायलॉज और प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

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