❗*आसुरी शक्तियों से* - मुठभेड़ भी करनी पड़ेगी । कोई आंदोलन जब : ❗*आसुरी शक्तियों से* - मुठभेड़ भी करनी पड़ेगी❗ कोई आंदोलन जब प्रखरता के साथ सफलता की ओर बढ़ता है तो आसुरी आक्र
Sat, Jun 20, 2026
आसुरी शक्तियों से* -
मुठभेड़ भी करनी पड़ेगी
कोई आंदोलन जब प्रखरता के साथ सफलता की ओर बढ़ता है तो आसुरी आक्रमण भी होते हैं। ऐसी परिस्थितियों की कल्पना सृजन सैनिकों को नहीं होती, फलस्वरूप वे घबड़ा जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में पड़े परिजनों की हौसला अफजाई के लिए पूज्यवर ने पहले से सबको सचेत किया है और आसुरी शक्तियों से न घबड़ाने और इन से संघर्ष करने हेतु मनोबल जुटाने का संदेश दिया है। जो हम सबके लिए आज भी प्रेरणाप्रद है। गुरुवर का यह संदेश अखण्ड ज्योति, अगस्त 1979 के पृष्ठ-55 पर प्रकाशित हुआ।
"प्रज्ञावतार ही निष्कलंक अवतार है। उसके प्रतिपादनों और समर्थकों को लोकश्रद्धा कैसे मिले ? इसके रचनात्मक आधार तो कितने ही हैं, पर एक निरोधात्मक आधार भी है- आसुरी आक्रमण। इसके पश्चात ही किसी महान व्यक्ति या आंदोलन की प्रौढ़ता का पता चलता है। कलंक कालिमा का दौर और अवरोध आक्रमणों का क्रम ही वह स्थिति उत्पन्न करेगा, जिससे निष्कलंक भगवान का सर्वत्र जय-जयकार होने लगे।
यह क्रम अपने अभियान में भी निश्चित रूप से चलेगा। चलता भी रहा है। प्रतिगामी निहित स्वार्थों द्वारा तरह-तरह के आक्षेप लगाए जाते रहे हैं। बदनाम करने का कोई अवसर उन्होंने नहीं छोड़ा। अश्रद्धा उत्पन्न करने के लिए जो कुछ कहा जा सकता था, जो कुछ किया या कराया जा सकता था, उसमें कहीं कुछ कमी नहीं रहने दी गई है। यह सारा उत्पात उन आसुरी तत्त्वों का है जो अवांछनीयताओं की सड़ी कीचड़ में ही डाँस, मच्छरों की तरह अपनी जिंदगी देखते हैं। कुछ ईर्ष्यालु हैं, जिन्हें अपने अतिरिक्त किसी अन्य का यश-वर्चस्व सहन ही नहीं होता। इसके अतिरिक्त सड़े टमाटरों का भी एक वर्ग है जो पेट में रहने वाले कीड़ों की, चारपाई पर साथ सोने वाले खटमलों की, आस्तीन में पलने वाले साँपों की तरह जहाँ आश्रय पाते हैं, वहीं खोखला भी करते हैं। बिच्छू अपनी माँ के पेट का मांस खाकर ही बढ़ते और पलते हैं, माता का प्राण हरण करने के उपरांत ही जन्म धारण करते हैं। कृतघ्नों और विश्वासघातियों का वर्ग इस युग में जिस तेजी से पनपा है, उतना संभवतः इतिहास में इससे पहले कभी भी नहीं देखा गया।
अवांछनीयता हर क्षेत्र में अड्डा डाले और जड़ जमाए बैठी है। युग परिवर्तन की प्रक्रिया भी उसे उखाड़ने की उसी क्रम और अनुपात से चलेगी, जितना कि सृजनात्मक सत्प्रवृत्तियों का संवर्द्धन। ऐसी दिशा में दुष्प्रवृत्तियों के सामने जीवन-मरण का प्रश्न उपस्थित होगा। अभियान को जब तक दुर्बल समझा जाएगा, तब तक उसे उपहास उपेक्षा का पात्र बने रहने दिया जाएगा। व्यंग्य-तिरस्कार बरसते रहेंगे, किंतु जब उसकी समर्थता और सफलता का आभास होने लगेगा तो विरोध एवं आक्रमण का सिलसिला चल पड़ेगा। अंततः वह देवासुर संग्राम उतना ही प्रचंड हो जाएगा, जितना कि सृजन प्रत्यावर्तन। इसके लिए प्रत्येक सृजन शिल्पी को पहले से ही तैयार रहना होगा। किसान का मुख्य काम अन्न उपजाना है, विभुक्षा का समाधान करना है। तो भी उसे इस कार्य क्षेत्र में आए दिन सर्प, बिच्छुओं, दीमकों, सुअर, भेड़ियों से मुठभेड़ के साधन सँजोकर रखने होते हैं। स्वयं श्रेष्ठ कर्म में निरत हैं, यह इस बात की गारंटी नहीं कि दुष्ट दुरात्माओं के आक्रमण होंगे ही नहीं। सज्जनता सामने से ही अनक्रामक दीखती हैं, पर परोक्ष रूप से उसमें भी दुष्टता की विघातक सामर्थ्य भारी परिमाण में भरी पड़ी है। असुर वस्तुस्थिति को समझता है, इसलिए देव पर कुछ प्रत्यक्ष कारण न रहने पर भी आक्रमण करने से चूकता नहीं। प्रकाश के उदय में अंधकार की मृत्यु है। इसलिए सूर्योदय से पूर्व एक बार सघन तमिस्रा जमा होती है और प्रकाश से जूझने का उपक्रम करती है, भले ही उसे अंततः मुँह की ही क्यों न खानी पड़े।
ऐसे निष्ठावान व्यक्ति जो आदर्शवाद को केवल पसंद ही न करें, वरन उसे व्यवहार में लाने के लिए कटिबद्ध हों और उस मार्ग में चलते हुए यदि असुविधाओं से भरा हुआ जीवन व्यतीत करना पड़े तो उसके लिए भी तत्पर रहे, महापुरुष कहलाते हैं। उन्हें इस धरती के धर्म स्तंभ कहते हैं। विख्यात होना न होना अवसर की बात है। नींव में रखे हुए पत्थरों को कोई नहीं जानता, किंतु शिखर के कंगूरे सबको दीखते हैं। कंगूरे टूटते-फूटते और हटते-बदलते रहते हैं, पर नींव के पत्थर अडिग हैं। इस प्रवृत्ति के बने हुए लोहस्तंभों को युगपुरुष कहते हैं। उन्हीं के द्वारा युगों का निर्माण एवं परिवर्तन व्यवस्था संपन्न होती है। विश्व शांति का विशाल भवन खड़ा करने के लिए ऐसे ही लोहस्तंभों की आवश्यकता है, जो बातें बनाने में, यश लूटने में दक्ष न हों, वरन त्याग और बलिदान का दबाव सहने के लिए भी तैयार हों।
--'गुरुवर की प्रेरणाएँ
असाटी समाज दमोह मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान कार्यक्रम सं : असाटी समाज दमोह के द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान कार्यक्रम संपन्न एसपी, डीएफओ और समाज के वरिष्ठ जनों ने 22 छा
Fri, Jun 19, 2026
असाटी समाज दमोह के द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान कार्यक्रम संपन्न
एसपी, डीएफओ और समाज के वरिष्ठ जनों ने 22 छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित
दमोह. नवयुवक मंडल असाटी समाज दमोह द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं का प्रतिभा सम्मान समारोह मंगलवार को शहर के असाटी वार्ड-1 स्थित संस्कार भवन में आयोजित किया गया.समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ.मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि (आईपीएस), वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) ईश्वर जरांडे, सीएसपी एच.आर. पांडे, टीआई कोतवाली मनीष कुमार, सेवानिवृत शिक्षक पीतांबर असाटी, श्रीमती निशा राजेश असाटी, शिक्षिका श्रीमती विद्या दिनेश असाटी तहसीलदार, समाजसेवी भगवान दास असाटी, विद्युत विभाग सेवानिवृत केएल असाटी और समाज अध्यक्ष वीरेंद्र असाटी मंच पर उपस्थित रहे.दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत नवीका असाटी और संस्कृति असाटी ने श्री गणेश भगवान की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभा का मन मोह लिया. इसके उपरांत अतिथियों का सम्मान किया गया.सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह, उपहार, पुष्पगुच्छ देकर व शाल-श्रीफल से वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया.सम्मान समारोह की बेला में कक्षा 10वीं और 12वीं एमपी बोर्ड व सीबीएसई के करीब 85 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले 22 छात्र-छात्राओं को पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि और डीएफओ ईश्वर जरांडे ने एक-एक कर मंच पर बुलाकर सम्मानित किया. सभी को शील्ड, उपहार और प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए.पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि (आईपीएस) ने उद्बोधन में बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा - आप सभी इसी तरह आगे बढ़ते रहो और मेरे जैसा मुकाम हासिल कर मंच पर बैठो. मेरी ओर से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं.वन मंडल अधिकारी ईश्वर जरांडे ने अपने वक्तव्य में बच्चों और समाजजनों को करियर व जीवन की जरूरी टिप्स दिए. उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए बच्चे उनके कार्यालय आ सकते हैं.उन्होंने सभी को खूब आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. कार्यक्रम का सफल मंच संचालन करने वाली सुश्री शिवानी असाटी की विशेष सराहना की गई.साथ ही समारोह की व्यवस्थाओं में लगे सभी स्वयंसेवकों के कार्यों की सराहना की गई. समाज भवन के जीर्णोद्धार और सामाजिक गतिविधियों में सहयोग देने वाले वरिष्ठजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई.कार्यक्रम के अंत में युवा अध्यक्ष विनय असाटी ने समाज के वरिष्ठजनों, शिक्षकों, महिला समिति, महासभा पदाधिकारियों, पत्रकार बंधुओं और युवा टीम के सभी सदस्यों का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया. उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक रवैये से ही कार्यक्रम सफल हो पाया है.कहा कि समाज के होनहार विद्यार्थियों को सम्मानित कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना नवयुवक मंडल का उद्देश्य है.भविष्य में भी शिक्षा, संस्कार और समाज उत्थान से जुड़े कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे.अंत में कार्यक्रम का आभार युवा उपाध्यक्ष विवेक असाटी (अप्सरा) ने किया.
यह सम्मानित हुए छात्र-छात्राएं
पुलिस अधीक्षक और डीएफओ सहित वरिष्ठ समाज जनों से सम्मानित हुए कक्षा दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्राओं में हर्ष देवी प्रसाद असाटी, अलीशा आनंद असाटी, परी मनीष नायक, प्रगति सुदामा असाटी, सक्षम जितेंद्र असाटी, कृष्ण कुमार खेमचंद असाटी, दीपांश प्रेमचंद असाटी, मुस्कान सुरेंद्र असाटी,अर्पिता दिनेश असाटी, हरिओम अजीत चौधरी निर्माण, समृद्धि अरविंद असाटी, आराध्य अजय असाटी, परी खेमचंद असाटी, विनायक उत्तम असाटी, छाया छोटेलाल, सपना देवी प्रसाद असाटी राधिका दिनेश, यश शाह अभिषेक असाटी, श्रेयांशी मनीष असाटी, देव असाटी इमलाई, कोहिल असाटी, अनुष्का असाटी का सम्मान किया गया और सभी ने तालियां बजाकर बधाई,शुभकामनाएं दी.