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79 वे स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई शुभकामनाएं

: उसने संकल्प लिया कि गौशाला नहीं उपाएं गौशाला नहीं उपाएं.. एक हिन्दू एक गाय... 

admin

Sun, Feb 23, 2025
18 वर्ष का नवयुवक  अख़बार लिए गांव में दौड़ता फिर रहा है और दौड़ता इसलिए फिर रहा है कि अख़बार के तीसरे पन्ने के चौथे कॉलम में उसका पूरा नाम छपा है नाम इसलिए छपा है क्योंकि किसी फलाने के यहां  युवक ने भागवत कथा वाची थी युवक का नाम "पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री" था अपने नाम की अख़बार कटिंग  गांव के हर बुर्जुग तक को उसने दिखाई खुशी ऐसी मानो एवरेस्ट फतेह किया हो अख़बार दिखा कर कहता... कि कक्का हमाओ नाम छपों अखबार में.. फिर एक रोज़ उसकी अख़बार में ब्लैक एन वाइट फोटो छपी जिसकी भी अख़बार कटिंग पूरे गांव में घूमी फिर धीरे-धीरे कलर फोटो... छपना शुरू हुईं फिर अख़बार के फ्रंट पेज पर पूरा इंटरव्यू भी आया फिर टीवी तक वो नाम पहुंचा फिर टीवी पर उस नाम पर बहस शुरू हुई फिर टीवी पर हुई उसकी शक्तियों पर शंका आखिर में जब बज गया डंका तो नाम सिर्फ "धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री" रह गया बागेश्वर वाले बाबा.... बाबा सिर्फ 27 साल के युवक ने बाबा बनना स्वीकार कर लिया... जब अख़बार पर पहली बार नाम आया था और टीवी पर फुल 2 घंटे का बकायदा इंटरव्यू तो दोनों में एक बात एक सी थी... वो था उसका व्यहवार, उसका व्यहवार नहीं बदला वही जुनून,जोश, ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास से उसने अख़बार में जैसे लोगों को नाम दिखाया था वैसे ही उसने टीवी पर अपना इंटरव्यू भी दिखाए... फिर धीरे धीरे धीरेंद्र... बागेश्वर बाबा बन गए और अपने संकल्पों को पूरा करने में लग गए... ये कोई लोकप्रियता पाने की लड़ाई नहीं थी ये ज़िद थी जो धब्बा सनातन संस्कृति पर लग रहा था उसे बदलना था... और उसने बदलना भी शुरू कर दिया ये विश्वास था अपने इष्ट के प्रति भक्ति भाव रखने का.. उस नवयुवक ने बहन की शादी करते समय कई कठिनाइयों का सामना करा था तब उसने संकल्प लिया कि ग़रीब की बेटी की शादी का जिम्मा वो लेगा और जितना बन सकेगा उतना करेगा फिर उसने कर दिए कई सैकड़ों विवाह और रच दिया इतिहास... जब उस युवक ने ग़ुरबतों के दौर में पानी में पारले जी खाए तो ज़िद पकड़ी की कोई भूखा न सोए फिर क्या था... जय बोलो मां अन्नपूर्णा की... हजारों..लाखों आदमियों को भंडारा कराया लेकिन खुद पारले जी खाने से बाज न आया.. उसने संकल्प लिया कि गौशाला नहीं उपाएं गौशाला नहीं उपाएं.. एक हिन्दू एक गाय...  जब उसने देखा कि बुंदेलखंड की पिछड़ी भूमि में लोग कैंसर की मार झेल रहे, इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे तब उसने संकल्प लिया कि कैंसर अस्पताल बने तो अपने इस सपने को साकार करने लग गया जी जान लगा दी और काम शुरू कर दिया... वो देश की राष्ट्रपति से लेकर लंदन, दुबई के राजाओं को भी सनातन धर्म के उपदेश दे चुका लेकिन फिर जब मिला एक दिव्यांग से तो ठीक वैसे ही जैसे कि थी राष्ट्रपति, राजाओं से मुलाकात.. वही फक्कड़ता, विनम्रता और शालीनता से उसने ब्रिटेन की संसद से लेकर यूएई के किंग से स्वीकारे कई सम्मान, और भारत लौट कर  कमरे के कीले पर टांग दिए... लेकिन जब कोई भीड़ में  बूढ़ी अम्मा लिए हो हाथ से बुना हुआ स्वेटर तो प्रोटोकॉल तोड़कर वो उसे भी अपनाएं... ख़ुद सुरक्षा के घेरे में रहने के बावजूद लोगों की सुरक्षा की फ़िक्र करे रात रात भर जागे और सत्संग करे ऐसा कोई साधारण पुरुष नहीं कोई "दिव्य पुरुष" ही कर सके...   ऐसे ही "दिव्य पुरुष" बागेश्वर सरकार का संकल्प पुरा होने जा रहा है कैंसर हॉस्पिटल का शिलान्यास करने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री पधार रहे है…

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