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: जिसके जीवन में संयम नहीं उसका जीवन सार्थक नहीं- उपाध्याय रत्न विश्रुत सागर जी

admin

Fri, Feb 14, 2025
जिसके जीवन में संयम नहीं उसका जीवन सार्थक नहीं- उपाध्याय रत्न विश्रुत सागर जी दमोह। जिसके जीवन में संयम नहीं उसका जीवन सार्थक नहीं मनुष्य के जीवन में संयम उतना ही महत्वपूर्ण होता है जिस तरह गाड़ी में ब्रेक का महत्व होता है बिना ब्रेक की गाड़ी कोई काम की नहीं होती संयम दिवस मनाने और उसकी अनुमोदन करने से एक न एक दिन हमारे जीवन में भी संयम आ जाता है और हमें मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है संसार का वैभव संयम के सामने कुछ नहीं संयम की नोका से ही भवसागर को पार किया जा सकता ळें उपरोक्त विचार गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी ने गुरुवार शाम 19 वे गुरु उपकार दिवस पर अभिव्यक्ति किये। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर धर्मशाला में आज पूज्य उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी एवं मुनि श्री निर्वेद सागर जी का मुनि दीक्षा संयम दिवस भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य प्रयोग सागर जी महाराज का मंगल सानिध्य भी सभी को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम शुभारंभ अवसर पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज की अष्ट द्रव्यों से पूजन की गई। सभी महिला मंडलों को बारी बारी से द्रव्य समर्पण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  उपाध्यक्ष श्री के प्राद प्रक्षालन का सौभाग्य मुनिश्री निर्वेद सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के परिजनों को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य जबलपुर शिवनगर मंदिर समिति से आए भक्तजनों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर प्रयोग सागर एवं मुंशी निर्वेद सागर महाराज ने भी अपने मंगल प्रवचनों में गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरु का उपकार इस जीवन में तो क्या सात जन्मों में भी नहीं चुकाया जा सकता। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सकल जैन समाज की मौजूदगी रही।

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