नेशनल हाईवे की गाइडलाइन के खिलाफ जल निगम का निर्माण : नगर परिषद ने चेताया – नियम विरुद्ध निर्माण तुरंत हटाओ, जल निगम बोला – पहले भुगतान दो!
admin
Sun, Jun 22, 2025
नेशनल हाईवे की गाइडलाइन के खिलाफ जल निगम का निर्माण
पटरी पर ऊंचे चेंबर बनाकर जनता की जान जोखिम में, अब हटाने के लिए मांग रहे पैसा!
नगर परिषद ने चेताया – नियम विरुद्ध निर्माण तुरंत हटाओ, जल निगम बोला – पहले भुगतान दो!
बकस्वाहा | संवाददाता – विनोद कुमार जैन
बकस्वाहा नगर की प्रमुख सड़कें अब जानलेवा बनती जा रही हैं। सागर रोड, छतरपुर रोड और दमोह रोड जैसे नेशनल हाईवे मार्गों पर जल निगम द्वारा बनाए गए ऊंचे चेंबर हर गुजरते वाहन के लिए खतरा बन गए हैं। नियमों की अनदेखी कर बने ये चेंबर अब सड़क चौड़ीकरण में बाधा और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
NHAI की गाइडलाइन का खुला उल्लंघन
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी प्रकार का निर्माण मुख्य सड़क से कम से कम 3 से 4 मीटर दूर ही किया जा सकता है। बावजूद इसके, जल निगम ने चेंबर सड़क की पटरी पर, कुछ जगहों पर तो बीचोबीच बना दिए, जिससे हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह खतरे में पड़ गई है।
चेंबर नहीं, हादसे का इंतजार
स्थानीय निवासी अनिल जैन , आशीष चौरसिया बताते हैं कि थाना परिसर, नैनागिर तिराहा और अन्य कई जगहों पर बने चेंबर न सिर्फ गलत जगह पर हैं, बल्कि सड़क से 5-6 इंच ऊंचे हैं।
वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है। बाइक, ऑटो और छोटे वाहन टकराकर गिर चुके हैं।
“रोड से अनजान बाहरी यात्री अंधेरे में इनसे टकरा रहे हैं। ये चेंबर हादसों का जाल हैं।”
— एडवोकेट वृजेश बिल्थरे , स्थानीय नागरिक
कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बोले – जान से बड़ा कोई भुगतान नहीं :-
“हर दिन कोई न कोई वाहन गिरता है। अगर कोई बड़ा हादसा हुआ तो क्या जल निगम जिम्मेदार मानेगा? जान से बड़ा कोई भुगतान नहीं हो सकता।”
— संजय दुबे, ब्लॉक अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी बकस्वाहा

नगर परिषद ने दिए निर्देश – हटाओ चेंबर, बनाओ 4 मीटर दूर
बकस्वाहा नगर परिषद के सब इंजीनियर शोभित मिश्रा ने बताया कि जल निगम को पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है:-
“सभी चेंबर हटाकर हाईवे से कम से कम 4 मीटर दूर बनाए जाएं ताकि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण और सुरक्षा व्यवस्था बनी रह सके।”
जल निगम की टालमटोल – पहले पैसा दो, तभी हटाएंगे
जल निगम के परियोजना प्रबंधक गौरव सिघई का बयान है:-
“हम चेंबर हटाने को तैयार हैं, लेकिन पहले नगर परिषद भुगतान करे। स्टिमेट भेज रहे हैं, पैसा मिलते ही हटाने की कार्रवाई की जाएगी।”
जनता में आक्रोश – गलती विभाग की, भुगते जनता?
सुरेन्द्र प्रजापति और महेन्द्र साथी जैसे कई समाजसेवी जनता की आवाज बनकर सवाल उठा रहे हैं: :- “जब निर्माण ही नियमों के विरुद्ध किया गया, तो उसका दंड जनता को क्यों? यह स्पष्ट विभागीय लापरवाही या संभावित भ्रष्टाचार है, जिसकी जांच जरूरी है।”
इस संबध मे तहसीलदार भरत पांडे का कहना है कि मै ही सभी चैम्बर की जॉच कराता हूँ और अगर चैम्बर नियम विरुद्ध पाये जाते है तो जल निगम को नोटिस जारी किया जायेगा।
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