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संयम और भक्ति से आलोकित हुआ बकस्वाहा : जैन मंदिर में विनौली एवं गोदभराई का भव्य आयोजन

Jankranti Express

Fri, Oct 24, 2025

संयम और भक्ति से आलोकित हुआ बकस्वाहा
जैन मंदिर में विनौली एवं गोदभराई का भव्य आयोजन

बकस्वाहा (संवाददाता विनोद कुमार जैन)।

शुक्रवार को बकस्वाहा का श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर संयम, त्याग और भक्ति के रंगों से निखर उठा। अवसर था—प्रमोद कुमार व सुबोध कुमार जैन ‘सुनवाहा’ की माताजी ब्र. सरस्वती देवी एवं बाल ब्र. रूबी दीदी (शाहगढ़) के विनौली एवं गोदभराई समारोह का।

कार्यक्रम में मुनि श्री 108 श्रुतेश सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुश्रुत सागर जी महाराज का मंगल सान्निध्य रहा। उनके प्रेरक प्रवचनों से मंदिर परिसर धर्ममय वातावरण में गूंज उठा।

सुबह अभिषेक और पूजन विधान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं ने आरती, कलश व पुष्प अर्पित कर भक्ति भाव से मंदिर का श्रृंगार किया। इसके बाद नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु जयघोष करते हुए शामिल हुए। मंगल गीतों की गूंज और पुष्पवर्षा ने पूरे नगर को भक्ति रस में डुबो दिया।

प्रवचन के दौरान मुनि श्री 108 श्रुतेश सागर जी महाराज ने कहा “संयम का मार्ग केवल त्याग नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष का साधन है। जब एक गृहस्थ आत्मबोध की ओर बढ़ता है, तब पूरा समाज उससे प्रेरणा पाता है।”

वहीं मुनि श्री सुश्रुत सागर जी महाराज ने कहा “संयम का अर्थ भोगों का त्याग मात्र नहीं, बल्कि भावों की निर्मलता है। जब आत्मा राग-द्वेष से मुक्त होती है, तभी सच्चा आनंद मिलता है।”

दोनों मुनिश्रियों ने समाज से संयम, अहिंसा और सदाचार अपनाने का आह्वान किया।

ब्र. सरस्वती देवी एवं बाल ब्र. रूबी दीदी को आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आर्यिका 105 विजिज्ञासाश्री माताजी के सान्निध्य में आगामी 29 नवम्बर 2025 को मंगलगिरि (सागर) में क्षुल्लिका दीक्षा का सौभाग्य प्राप्त होगा।

इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज, बकस्वाहा द्वारा आयोजन किया गया। समाजजनों ने कहा “यह दीक्षा की विदाई नहीं, बल्कि धर्म, संयम और त्याग की नई प्रेरणा है, जो सदैव स्मरणीय रहेगी।”

मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति, जयघोष और आशीर्वाद का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने मातेश्वरी और बाल ब्र. दीदी पर पुष्पवर्षा कर मंगल कामनाएँ व्यक्त कीं।

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