भक्तिरस और लोकसंस्कृति में डूबा बकस्वाहा : देवउठनी एकादशी पर पाँच दिवसीय पारंपरिक कदम्ब मेला महोत्सव का शुभारंभ
Jankranti Express
Sat, Nov 1, 2025
भक्तिरस और लोकसंस्कृति में डूबा बकस्वाहा — देवउठनी एकादशी पर पाँच दिवसीय पारंपरिक कदम्ब मेला महोत्सव का शुभारंभ
विनोद कुमार जैन, संवाददाता | बकस्वाहा
देवप्रबोधिनी एकादशी के पावन अवसर पर बकस्वाहा नगर भक्ति, आस्था और लोकसंस्कृति की रंगत में डूब गया। नगर परिषद बकस्वाहा, संस्कृति संस्कार मंच एवं बजरंग दल अखाड़ा बकस्वाहा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय पारंपरिक कदम्ब मेला सांस्कृतिक महोत्सव 2025 का शुभारंभ रविवार को हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर परिषद अध्यक्ष किरण वृजगोपाल सोनी, उपाध्यक्ष नीमा देवी राजपूत, तहसीलदार भरत पांडे, मुख्य नगरपालिका अधिकारी नेहा शर्मा तथा नगर निरीक्षक जितेन्द्र वर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं मां सरस्वती की वंदना कर किया। इस अवसर पर नगर के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, व्यापारी वर्ग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मैदान में उमड़ी भीड़, झूमे श्रद्धालु
पहली बार यह मेला वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी स्टेडियम में आयोजित किया गया। रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मैदान में सजे झूले, दुकानों और सजावट ने माहौल को पूरी तरह मेलामय बना दिया। भक्ति गीतों की गूंज और रोशनी की जगमगाहट से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया।
पहले दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने भक्ति गीत, लोकनृत्य और धार्मिक झांकियों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत कृष्ण-रास लीला तथा महिला कलाकारों द्वारा गाए गए “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” भजन पर दर्शक झूम उठे।
मेले में स्थानीय व्यापारियों और विद्यालयों ने हस्तशिल्प, झांकियां, पारंपरिक व्यंजन व घरेलू उत्पादों के स्टॉल लगाए। शाम होते-होते दीपों की रौशनी से नहाया मैदान किसी तीर्थस्थल का आभास दे रहा था।
वर्षों से बस स्टैंड के पास स्थित कदम्ब मैदान में आयोजित होने वाला यह पारंपरिक मेला इस बार पहली बार स्थानांतरित कर स्टेडियम में आयोजित किया गया। तहसीलदार भरत पांडे, नगर निरीक्षक जितेन्द्र वर्मा, सीएमओ नेहा शर्मा, अध्यक्ष किरण वृजगोपाल सोनी एवं उपाध्यक्ष नीमा देवी राजपूत व नगर परिषद के समस्त जनप्रतिनिधिओ की उपस्थिति मे शुभारंभ किया गया
हालांकि खेल मैदान में आयोजन को लेकर खेलप्रेमियों ने असंतोष जताया, लेकिन मेले के बढ़े आकार और भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से प्रशासन ने स्टेडियम को उपयुक्त स्थान माना। विस्तृत क्षेत्रफल के कारण दुकानदारों को पर्याप्त जगह मिली और मेले में सुचारू रूप से भीड़ का नियंत्रण बना रहा।
महिलाओं की आस्था से जुड़ा कदम्ब वृक्ष पूजन
कदम्ब मेले की मुख्य विशेषता कदम्ब वृक्ष पूजा है। कार्तिक मास में व्रत रखने वाली महिलाएं बकस्वाहा व आसपास के सौ से अधिक गांवों से अमोनिया नृत्य करती हुई मेले में पहुंचती हैं और कदम्ब वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। लोकमान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी से ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
3 नवम्बर (सोमवार) — क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
4 नवम्बर (मंगलवार) — जवाबी कीर्तन: क्रान्तिमाला एंड पार्टी (कानपुर) एवं राजू रंगीला एंड पार्टी (रायबरेली)
5 नवम्बर (बुधवार) — बुन्देली लोककला संगम एवं झांकी नृत्य प्रतियोगिता
नगर परिषद, संस्कृति संस्कार मंच एवं बजरंग दल अखाड़ा बकस्वाहा के संयुक्त प्रयासों से सजे इस ऐतिहासिक मेले ने एक बार फिर बकस्वाहा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दी है।
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